5 अगस्त 2025 की दोपहर तकरीबन 3:50 बजे के समय—मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार Kheer Ganga नदी के उच्च क्षेत्र में अचानक भारी वर्षा, यानी क्लाउडबर्स्ट, हुई। खतरनाक तीव्र बारिश के चलते नदी एक बवंडर की तरह बज़्रगतिक प्रवाह में फैल गई। लगभग 40 सेकेंड में इस प्रवाह ने Dharali ग्राम को पूरी तरह चपेट में ले लिया, जिसमें पूरा ही गाँव पानी‑कीचड़ में बह गया। इसने होटल, घर, दुकान, बाज़ार—जो कुछ भी था—मिट्टी और पानी की बाढ़ में बहा दिया
रात भर का आतंक
दृश्य अत्यंत भयावह थे: कीचड़ भरी लहरें घरों के बीच से गुज़र रही थीं, लोग चीख-चीख कर भाग रहे थे, कहीं दहशत, कहीं निराशा। एक स्थानीय वीडियो में किसी की दमघुट आवाज सुनाई देती है: “Everything is finished.” यानी “सब खत्म हो गया” ।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, करीब 25‑30 होटल और होमस्टे और 40‑50 घर, बाज़ार की दुकानें और स्थानीय संरचनाएं बहा ली गईं। अनुमानित है कि करीब दस से बारह लोग मलबे के नीचे धंसे हुए हो सकते हैं ।
परिणाम: मौत, लापता और तबाही
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न्यूनतम 4 लोग मारे गए—उत्तरकाशी जिला मजिस्ट्रेट प्रभात आर्य ने पुष्टि की ।
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करीब 100 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिसमें स्थानीय नागरिक और पर्यटक शामिल हैं ।
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लगभग 8 से 10 भारतीय सेना के जवान भी लापता हैं, जो Harsil बटालियन में तैनात थे ।
घायल व्यक्तियों का इलाज तुरंत Harsil की सेना मेडिकल सुविधा में किया गया। अब तक 20 से 70 लोग सेना, ITBP, NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाए जा चुके हैं ।
खोज और पुनः प्राप्ति अभियान: युद्धस्तर पर राहत कार्य
घटना की ख़बर मिलते ही ऊँचाई इलाकों में तैनात Ibex ब्रिगेड की सेना, NDRF, SDRF, ITBP जैसी एजेंसियाँ तुरंत भेजी गईं। सेना ने कहा कि उनकी 150 वाहक टीम तुरंत घटनास्थल पहुँचने में सक्षम रही, जिसका कोई शव जारी नहीं हुआ, लेकिन राहत कार्य तीव्र गति से जारी है ।
तीन हेलीकॉप्टर (Chinook, Mi-17, ALH Cheetah) ऑपरेशन सुपुर्द थे, लेकिन मौसम खराब होने के कारण उनका उपयोग सीमित रहा ।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और वरिष्ठ स्तर की निगरानी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे “अत्यंत दुखद और चिंताजनक” बताया, साथ ही राहत‑रक्षात्मक कदमों को ‘war‑footing’ पर बताया। वे लगातार वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क में हैं और जिला प्रशासन की रोहेट कंट्रोल रूम से स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं ।
केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया में गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री धामी से बात की और NDRF और ITBP की कई टीमें तुरंत भेजने का आश्वासन दिया; साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभावितों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि “एक भी पत्थर न छोड़ा जाएगा” सहायता के लिए ।
मौसम का ख़तरा: चेतावनी जारी
IMD ने उत्तराखंड के कई क्षेत्रों के लिए भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है, वहीं उत्तरकाशी जिले में सभी शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का आदेश जारी किया गया है ताकि किसी और आपदा से बचा जा सके ।
पर्यावरणीय और संरचनात्मक कारण: मानवीय हस्तक्षेप का सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या सिर्फ प्राकृतिक आपदा तक सीमित नहीं है—Bhagirathi Eco‑Sensitive Zone (BESZ) में अनियंत्रित निर्माण, पर्यटन-प्रेरित अव्यवस्थित विकास, और नदी किनारों के इस्तेमाल ने आपदा की तीव्रता को बढ़ाया। पर्यावरणविदों ने कट्टर भूमि नियमन, जल-प्रबंधन और पूर्व चेतावनी प्रणालियों की ज़रूरत पर बल दिया है ।
भविष्य के लिए क्या सबक?
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क्लाउडबर्स्ट जैसी आपदाओं के लिए अग्रिम चेतावनी तकनीक और अलर्ट सिस्टम विकसित करना होगा।
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हिमालयी क्षेत्रों में निर्माण और पर्यटन गतिविधियों की समीक्षा और नियंत्रण ज़रूरी है।
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सर्विसेज और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का डिज़ाइन इस तरह से होना चाहिए कि आपातकालीन समय में राहत पहुँचाई जा सके।
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स्थानीय समुदायों में आपदा-प्रबंधन जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत है।
निष्कर्ष
40 सेकेंड की घटना ने Dharali गाँव को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।-क्लाउडबर्स्ट की अचानक प्रलयकारी बारिश ने पूरा गाँव समेट लिया, जिसमें बुनियादी ढांचा, घर, होटल सब नष्ट हो गए। अब तक 4 लोगों की मौत, लगभग 100 लोग लापता, और कई सेना जवान भी लापता हैं।
राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन मौसम और भौगोलिक अड़चनें बाधाएँ बनी हुई हैं। प्रशासन, विशेषज्ञों और जनता को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि सुनियोजित भूमि उपयोग, पर्यावरणीय सुरक्षा और पूर्व चेतावनी व्यवस्थाओं से भविष्य में इस प्रकार की त्रासदियों को रोका जा सके।

